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आलोचक देवेंद्र चौबे : साहित्य इतिहास के पुनर्लेखन की ओर बढ़ते ऐतिहासिक महत्व के पांच कदम

  हिंदी साहित्य के इतिहास लेखन की लम्बी परम्परा है।  बहुत से इतिहास लिखे गए, धीरे धीरे काम इतना बड़ा होता चला गया कि कुछ संस्थाओं से बहुत से लेखकों को अपने साथ जोड़कर वृहद् इतिहास के अनेक खंड  प्रकाशित हुए।  परन्तु जो काम होने से रह गया था वह था इतिहास दृष्टि से आये बदलाव के लिहाज़ से उसे दोबारा लिखना, दूसरा वहां छूट गए अन्तराल को भरना और तीसरा सभी कृतियों का अपने युगबोध के मुताबिक पुनर्पाठ करना। हमें प्रसन्नता है कि इस दिशा में हमारे समय के कुछ महत्वपूर्ण आलोचक सक्रिय हुए हैं। इस सन्दर्भ में देवेंद्र चौबे बहुत से लेखकों को अपने साथ जोड़कर एक बड़ी परियोजना पर काम करने में लगे हैं। हिंदी साहित्य के इतिहास के पुनर्लेखन के लिए भूमिका बनाने की लिहाज से यह काम अत्यंत जरुरी है जो इस क्षेत्र में एक बड़े अभाव की पूर्ति करने जा रहा है। पांच खण्डों की इस परियोजना में प्रोफेसर  देवेंद्र चौबे व उनके सहयोगी संपादक प्रखर युवा आलोचक अजय कुमार यादव और गणपत तेली के सपादन में पहला खंड 'हिंदी साहित्य का इतिहास : कुछ पाठ, कुछ विचार' पिछले ही वर्ष अक्तूबर में जारी किया गया था। अभी इस के द...

आलोचक विनोद शाही: हिंदी आलोचना में एक नई जमीन तोड़ने का प्रयास

शुरूआती दौर में टेरी ईगल्टन की किताब 'लिटररी थ्योरी' और रेमंड विलियम्स की 'मार्क्सिज्म एंड लिटरेचर' ने मेरी रूचि पश्चिम की आलोचना पद्धतियों की ओर बढ़ाई । मैं उन विमर्शों के स्कूलों की तरफ गया, जो इन पद्धतियों के सामने आने की भूमिका बने थे। फ्रैंकफर्ट स्कूल की इस सन्दर्भ में जो क्रांतिकारी भूमिका रही है उससे कुछ ज्यादा ही प्रभावित हुआ था। लेकिन पश्चिमी विमर्शों के प्रभाव में अपना काम करना अलग बात है और साहित्य की जमीन पर अपना घर बनाना एकदम अलग बात। मेरे मन में यह विचार बार बार परेशानी सी पैदा करता रहा है। क्या हिंदी में कोई आलोचना के सिद्धांतों पर कोई ऐसी मौलिक किताब लिख सकता है जिसे इस तरह की वैश्विक महत्व की किताबों के समकक्ष रखा जा सके। मेरी इस दबी छिपी आकांक्षा की पूर्ति मेरे दोस्त वरिष्ठ आलोचक एवं चिंतक विनोद शाही ने की है। अभी उनकी इसी दिशा में एक और लम्बा सफर तय करने की प्रबल इच्छाशक्ति अभी भी बची है। विनोद शाही की किताब 'आलोचना की जमीन' जैसे ही मेरे पास प्रकाशन के लिए आई, मुझे लगा कि यहां हिंदी आलोचना की सैद्धांतिकी की दुनिया में एक नया अध्याय लिखे ...